आलोक तोमर जन्में चंबल घाटी में लेकिन एनसीसी की फायरिंग को छोड़ कर कभी उन्होंने बंदूक नही थामी। सत्रह साल की उम्र में एक छोटे शहर के बड़े अखबार से उन्होंने जिंदगी शुरू की और जल्दी ही मुंबई आदि में धक्के खाने के बाद दिल्ली पहुंच गए। पहली नौकरी मिली यूनाईटेड न्यूज ऑफ इंडिया की हिंदी सेवा यूनीवार्ता में और वहां से निकाल दिए गए क्योंकि नींद की झोंक में वे किक्रेट के एक सितारे से शतक बनवा बैठे थे जो दुनिया में था ही नही। किक्रेट वैसे भी उनकी समझ में खास आती नही।
यूनीवार्ता से निकले तो जनसत्ता में पहुंचे और वहां दिल लगा कर काम किया और अपने संपादक गुरू प्रभाष जोशी के हाथों छह साल में सात पदोन्नतियां पा कर विशेष संवाददाता बन गए। निकाले वहां से भी गए लेकिन वह अलग कहानी है। इसके बाद बीबीसी हिंदी, रीडिफ समाचार सेवा, पायनियर, आजतक, जी टीवी, स्टार प्लस, एनडीटीवी, होम टीवी, यहां तक कि जैन टीवी तक में और इसके अलावा दैनिक भास्कर और कई देशी विदेशी अखबारों के लिए अंदर और बाहर रह कर काम करते रहे।
फीचर सेवा शब्दार्थ की स्थापना 1993 में कर दी थी और बाद में इसे समाचार सेवा डेटलाइन इंडिया बनाया। इस बीच इंटरनेट की कृपा ने डेटलाइन इंडिया को वेबसाईट बना दिया और अब आलोक तोमर डॉट काम भी नेट जाल पर उपलब्ध है।