91 साल के हुए अटल, पहली बार कोटा स्टेशन पर मिले थे आडवाणी से

25 दिसंबर
नईदिल्ली।
राजनीति के पुरोधा पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी का आज जन्मदिन है. भारत रत्न वाजपेयी 91 साल के हो गए हैं. राजनीति में अटल जी की शख्सियत वाला नेता शायद ही कोई हुआ हो. उनका जीवन हमेशा एक खुली किताब की तरह रहा है. उनके जीवन में छिपाने जैसा कुछ भी नहीं है.
1- भारतीय राजनीति में कभी दो अलग-अलग शख्सियत होने के बावजूद एक नाम बन चुके अटल- आडवाणी की पहली मुलाकात कहां हुआ थी. ये बहुत ही कम लोग जानते हैं. ये बात 1951-52 की है जब दोनों आरएसएस के प्रचारक थे और कोटा रेलवे स्टेशन पर जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्वागत के लिए खड़े थे. वहीं पर पहली अटल और आडवाणी का आपस में परिचय हुआ था।
2- देररादून के रहने वाले नरेंद्र स्वरूप मित्तल अटल जी के गहरे दोस्त हैं. वो बताते हैं कि अटल जी को मंसूरी जाना बेहद पसंद था. वो 30 बार अटल जी को मसूरी ले जा सकें. अटल जी कहते थे कि वो किसी को न बताएं कि मैं यहां आया हूं. मैं आम आदमी की तरह रहना चाहता हूं. मैंं दुकान में खड़े होकर आम आदमी की तरह चाट खाना चाहता हूं।
3- अटल जी को मिठाई बहुत पसंद थी. वो देश के जिन शहरों में जाते थे. सबसे अच्छी मिठाई की दुकान खोजते थे. काशी में अखबार के संपादक बनाए गए अटल जी को वहां कि राम-भंडार मिठाई की दुकान के मीठे परवल बहुत पसंद थे. लेकिन इतने पैसे नहीं थे कि रोज खा सकें. वो जब भी सबके साथ दुकान के सामने से निकलते तो कहते कि आंखें बंद कर लो नहीं मीठे परवल बहुत दुख देंगे।
4- अटल जी ने पहला चुनाव 1955 में लड़ा था लेकिन वो हार गए. बाद मे बलरामपुर से 1957 में फिर लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए. यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई.
5- अटल जी लखनऊ से कई बार सांसद चुने गए. लखनऊ में वाजपेयी का लस्सी के और मिठाई के प्रति प्रेम जग जाहिर था. लखनऊ में किसी भी दुकान में खड़े होकर लस्सी पीने लग जाते थे।
6- ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से पढ़े वाजपेयी कभी भाषण देने का अभ्यास शीशे के सामने खड़े होकर करते थे. वही शख्स एक ऐसा नेता बन गया जिसे सुनने के लिए भीड़ भी ठिठक जाया करती थी।
7- 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में शिंदे की छावनी की तंग गलियों में गिरिजाघर की घंटी ने जैसे ही क्रिसमस यानी 25 दिसंबर शुरू होने की घंटी बजाई तभी कमलसिंह के बाग में एक छोटे से घर में किलकारी सुनाई दी. ये किलकारी थी अटल बिहारी वाजपेयी की और ये घर था पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी का। मां कृष्णा की अटल सातवीं संतान थे. वाजपेयी को उनकी मां बचपन में अटल्ला कहकर सुनाती थी।
8- संसद में अशोक होटल बनाने का प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी. उस समय प्रधानमंत्री नेहरू जी थे. वाजपेयी नए सांसद थे. उन्होंने कहा नेहरू जी की आलोचना करते हुए कहा था कि सरकार का काम होटल बनाना नहीं है।
9- संसद में अटल जी ने कि सहिष्णुता इस देश कि मिट्टी में हैं. इस देश में किसी को सूली पर नहीं चढ़ाया गया था. किसी को पत्थर नहीं मारे गए थे. यहां कोई एक पैगंबर नहीं है. ये अनेकवांत का देश है।
10- वाजपेयी ने संसद में पुरानी परंपराओं को प्रहार करते हुए कहा कि सांप्रदायिकता दो धारी तलवार है. भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं रहना चाहिए. लेकिन 5 हजार की सभ्यता और संस्कृति पर हमें गर्व होना चाहिए. हमारे अपने जीवन मूल्य हैं।

वाजपेयी ने भारत को 'असाधारण' नेतृत्व दिया : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनके जन्मदिन की बधाई दी। मोदी ने कहा, अटलजी ने मुश्किल की घड़ी में भारत को असाधारण नेतृत्व प्रदान किया।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, हमारे प्यारे अटल जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। मुश्किल की घड़ी में देश का नेतृत्व करने वाले व्यक्तित्व को सलाम।
मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, पार्टी नेता हो, संसद सदस्य हो या फिर मंत्री और प्रधानमंत्री। अटली जी ने प्रत्येक भूमिका में स्वयं को प्रतिष्ठित किया है। यही उनकी खासियत है।
मोदी ने कहा कि वह शुक्रवार को अटल से मिलने जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, शाम दिल्ली पहुंचने के बाद सीधे अटलजी के आवास पर जाऊंगा और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जन्मदिन की बधाई दूंगा।

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