छग: JNU के 3 प्रोफेसर्स पर देेशद्रोह का आरोप, ग्रामीणों को नक्सलियों का साथ देने के लिए भड़काया

20 मई

रायपुर। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के तीन प्रोफेसर्स के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चल सकता है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच में जेएनयू के 3 प्रोफेसर्स को देशद्रोह और छत्तीसगढ़ जन सुरक्षा अधिनियम के तहत दोषी पाया है। हालांकि इस मामले की पूरी तफ्तीश के बाद ही आरोपी प्रोफेसर्स की गिरफ्तारी होगी।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों को नक्सलवादियों की सहायता के लिए भड़काना जेएनयू के प्रोफेसरों को भारी पड़ सकता है। अपराध दर्ज करने से पहले पुलिस ने तीनों प्रोफेसरों को उनके बयान दर्ज करने के लिए नोटिस जारी करने का फैसला किया है। इन तीनों प्रोफेसर्स ने 12 से 16 मई के बीच बस्तर के कुछ गांव का दौरा किया था और वहां ग्रामीणों से नक्सलिओं का साथ देने वरना गांव जलाने की धमकी दी थी। ग्रामीणों की शिकायत के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस के 8 अधिकारियों की टीम ने ग्रामीणों के आरोपों की जांच की। हालांकि तफ्तीश अभी भी जारी है।

ग्रामीणों को साथ देने के लिए भड़काया

बस्तर एएसपी विजय पाण्डे के अनुसार जेएनयू प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, विनीत तिवारी के बारे में ग्रामीणों ने बताया की वो साफतौर पर नक्सलिओं का साथ देने के लिए उन्हें भड़का रहे थे। इनमें में से एक प्रोफेसर ने उनसे कहा की ना तो केंद्र और ना ही राज्य सरकार उनके लिए कुछ कर सकती है। सिर्फ नक्सली ही उनकी मदद कर सकते हैं। एक प्रोफेसर ने तो उन्हें धमकी भी दी की वे नक्सलिओं के साथ रहें नहीं तो नक्सली उनके गांव को जला देंगे।

ग्रामीणों ने भी की थी शिकायत

ग्रामीणों ने पुलिस को लिखित शिकायत दी की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, ऋचा केशव और विनीत तिवारी उनसे रूबरू हुए। शुरू में तो उन्होंने उनका हाल चाल जाना और पुलिस और नक्सलिओं की गतिविधियों के बारे में बातचीत की, लेकिन जाते-जाते उन्होंने उन्हें धमकी दी की वे नक्सलिओं के साथ रहे नहीं तो नक्सली उनके गांव को जला देंगे। ग्रामीणों की इस शिकायत के बाद हरकत में आए पुलिस मुख्यालय ने आठ अधिकारियों की टीम गठित कर ग्रामीणों से सिलसिलेवार जानकारी इकठ्ठा की। तीनों प्रोफेसरों से मिलने-जुलने वालों का ब्यौरा तैयार किया। ग्रामीणों के साथ हुई बातचीत रिकॉर्ड की गई। इसके बाद प्राथमिक रूप से तीनों प्रोफेसरों के आचरण को गैरजिम्मेदार पाया गया।

पुलिस ने अपनी प्राथमिक जांच में यह भी पाया कि तीनो प्रोफेसर ग्रामीणों को सरकार के खिलाफ बगावत के लिए उकसा रहे थे। उनका आचरण देशद्रोह के अंतर्गत पाया गया है।

 

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