असम में सर्बानंद सोनोवाल की ताजपोशी, ली शपथ

24 मई

गुवाहाटी। असम मेें भाजपा विधायक दल के नेता सर्बानंद सोनोवाल ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी में हुआ। सर्बानंद के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे।

सोनोवाल के शपथ ग्रहण समारोह में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा एन.डी.ए. से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, रमन सिंह, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी शिरकत की। तमाम केंद्रीय मंत्री से लेकर भाजपा के सभी बड़े नेताओं को भी इस समारोह का न्यौता भेजा गया था। गौरतलब है कि असम में कांग्रेस ने 15 साल तक शासन किया है। वहां पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

ये बने मंत्री

हेमंता बिस्वा शर्मा ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। असम भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रंजीत दत्ता, कलियाबोर से सांसद रहे एजीपी के नेता केशव महंता, चंद्रमोहन पटवारी, परिमल शुक्ल वैद्य, बोराखाट सीट से एजीपी विधायक अतुल बोरा ने मंत्री पद की शपथ ली।

शपथ ग्रहण के बाद सोनेवाल ने प्रधानमंत्री का अभिवादन किया।

असम में 15 साल से थी कांग्रेस की सत्ता

असम में कांग्रेस ने 15 साल तक शासन किया है। वहां पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। वैसे तो जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने का सपना आरएसएस ने जनसंघ की स्थापना के साथ ही देखना शुरू कर दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण अडवाणी के नेतृव में पार्टी ने कई राज्यों में अपनी सरकार बनाई। 2008 में कर्नाटक में यदुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाने के साथ बीजेपी का कमल दक्षिण में भी खिल गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2015 में जम्मू-कश्मीर में मुफ्ती मोहमद सईद के साथ गठबंधन की सरकार भी बनी।

सोनोवाल के सामने होंगी कई चुनौतियां

असम के मुख्यमंत्री का पद सर्बानंद सोनोवाल के लिए कांटों भरा ताज है, क्योंकि यहां पर सोनोवाल को विपक्ष से कम अपनों से ज्यादा चुनौती मिलेगी। इसलिए बीजेपी हेमंता विश्वशर्मा को लेकर चिंतित भी है। हालांकि, वो असम में उपमुख्यमंत्री या फिर केंद्र सरकार में असम का प्रतिनिधित्व करेंगे, इस पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को लेना है।

सर्बानंद मोदी के हैं निजी पसंदीद नेता

भाजपा के सत्ता में आने के मात्र पांच साल के भीतर ही मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे सर्बानंद सोनोवाल को प्रधानमंत्री मोदी की निजी पसंदीदा नेता भी माना जाता है, यही कारण है कि आम चुनावों में जीत के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रियों को शपथ दिलवाई तो सोनोवाल को खेल जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय देकर हर किसी को चौंका दिया था। उसके बाद राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी और उनके सिपहसालार अमित शाह का सोनोवाल पर अटूट विश्वास उस समय भी दिखा जब उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित कर दिया गया।

ये बातें सोनोवाल को बनाती हैं खास

सर्बानंद सोनोवाल ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी, इसके बाद वह असम गण परिषद से विधायक, मंत्री और सांसद भी बने।

राजनीति के 20 साल से ज्यादा लंबे कॅरियर में सोनोवाल की छवि हमेशा बेदाग ही रही। न उनके दामन पर भ्रष्टाचार का कोई दाग लगा न विवादों से उनका कोई नाता रहा।

बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर वह असम में घर घर एक जाना पहचाना चेहरा बन गए। इस आंदोलन ने उनकी एक जुझारू नेता की छवि भी स्‍थापित की। उनकी इन खूबियों ने मोदी को खासा प्रभावित किया।

ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन में सुधार के लिए भी उन्होंने ओलंपिक पोडियम स्कीम जैसी योजनाओं को तेजी से परवान चढ़ाया।

सर्बानंद सोनोवाल मूल रूप से आसाम के आदिवासी समुदाय से आते हैं। आसाम की कुल जनसंख्या में से 53 फीसदी ट्राइबल ही है। वह इससे पहले राज्य में अगप सरकार के दौरान वह कई मंत्रालयों में कार्यभार संभाल चुके हैं। राज्य की प्रशासनिक मशीनरी पर भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।

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