शिशु की छोटी-छोटी तकलीफों को न करें नजरअंदाज

06  अगस्त

जाहिर है नन्हें शिशु के साथ जब हर चीज पहली बार होती है तो माता-पिता के लिए भी यह एक परीक्षा की घड़ी हो जाती है। एक शिशु की संपूर्ण विकास प्रक्रिया के दौरान वह कई सारी नई स्थितियों से गुजरता है। यही वह समय होता है जब विकास की प्रक्रिया और बाहरी वातावरण से तालमेल बैठाने के दौरान उसका शरीर कई समस्याओं से भी दो-चार होता है। ये समस्याएं भले ही सामान्य हों पर इन्हें अनदेखा यानि नजरअंदाज करना शिशु के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

शिशु जब केवल दूध पर रहता है तब भी और जब वह सामान्य भोजन शुरू करता है तब भी उसकी तकलीफें बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ महीने के शिशु का एक दिन में 5-6 या इससे ज्यादा भी अधिक बार पॉटी करना सामान्य बात है, बच्चें को यदि दस्त, उल्टी या अन्य कोई समस्या हो तो सबसे पहले खाने पर ध्यान दें। इस हालत में बच्चों को जूस, दूध जैसी चीजें देने से बचें। और हां पानी बार-बार पिलाते रहें ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सकें। पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

बच्चों की नाजुक त्वचा होने के कारण रैशेज से त्वचा संबंधी संक्रमण जल्दी हो जाते है। इसलिए बच्चों के कपड़े, तौलिए, सॉफ्ट खिलौने आदि को साफ-सुधरा रखें। बहुत ज्यादा त्वचा पर क्रीम, तेल, लोशन आदि ने लगाएं। और हां अपने हाथ भी साफ रखें। बच्चों को बुखार या अन्य तकलीफ होने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं। दांत निकलना एक सामान्य प्रक्रिया है। दांत निकलते समय बच्चों को दस्त, उल्टी या बुखार आना सामान्य प्रक्रिया है घबराएं नहीं घरेलू उपाय अपनाएं। और जरूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

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