अजन्मे बच्चे - रश्मि रमानी

09 मई

अजन्मे बच्चे

कोख की सीपी में

बन जाते हैं मोती

स्वाति नक्षत्र की बूँद की तरह

बंद होता है कामना का बीज

भीतर की दरा़जों में

जब उठती हैं समन्दर में लहरें

बेचैन होने लगते हैं किनारे

तब,

अस्त-व्यस्त हो जाता है सब कुछ

बीज को जब मिलता है उर्वर प्रदेश

आशाओं के अम‌ृत-कण

तो,

जल्दी ही अंखुआते हैं बीज

और

फलवती होती है कोई कामना

अजन्मे बच्चे में

भीतर के अंधेरे में चन्द्र-बिन्दु की तरह

बाहर के उजाले में आँखें खोलते हैं अजन्मे बच्चे

प्रकाश-पुंज की तरह

वे शरीर के अंदरूनी तहखानों को ही नहीं जानते

परिचित होते हैं, वे तो,

उन अनकहे अनगिनत रहस्यों से भी

जिन्हें कभी शब्द नहीं मिली

अजन्मे बच्चे

बूझ लेते हैं वह पहेली

जिसे नहीं बूझ पाते तमाम लोग

और

भटकते रहते हैं भूल भुलैया में

अजन्मे बच्चे

सिर्फ़ अंतरंग क्षणों के साक्षी नहीं होते

वे जानते हैं चक्रव्यूह को भेदना

संसार के कपट को

जान लेते हैं वे संसार में आने के पहले

अजन्मे बच्चे आते हैं खामोशी से

पर

उनकी आहट

हर पल एक दस्तक होती है

भीतर के दरवाजों पर

उनके आने से झरता है पीला प्रकाश

जैसे

वे सूर्यमुखी हो अंधेरे के

उजाड़ में चमकते हैं जुगनू

और वीराने में टिमटिमाते हैं

अनगिनत तारे

अजन्मे बच्चे

सर्वोत्तम संपदा हैं विश्व की

अनहोनी यदि नष्ट कर दे कभी

विश्व के सारे पुरुषों को

तब भी थमेगा नहीं सृष्टि का चक्र

उसे चलाएँगे उसी समय

वे अजन्मे बच्चे

जो संरक्षित बीजों की तरह

सहेज कर रखे होते हैं

अनगिनत स्त्रियों की कोख के भंडारों में।

अजन्मे बच्चे खूब जानते हैं

नफ़रत और प्यार को

अपने आगमन के प्रति बेहद सतर्क

जल्दी ही तय कर लेते हैं वे

नफ़रत और प्यार की सरहद

वासना के ज्वार

और, प्रेम की शांत झील में उठी लहर का फ़र्क

गढ़ जाता है उनका व्यक्तित्व

उनके आकार लेने के पहले।

अजन्मे बच्चे नहीं क्षमा करते

मनुष्य के कुछ अपराध

वे तपस्वी

जो जन्मना चाहते हैं

अनेक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए

पर,

मनुष्य की क्रूरता जब साधती है निशाना

अजन्मे बच्चों पर

तब, मरने के पहले कई बार

देते हैं वे शाप

और

उर्वर भूमि बदल जाती है

सूने रेगिस्तान में।

 

@ रश्मि रमानी

 

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