फूल नहीं बदले गुलदस्तों के

12 जुलाई

 

उमाकान्त मालवीय
    टूटे आस्तीन का बटन

या कुर्ते की खुले सिवन

कदम-कदम पर मौके, तुम्हें यादन करने के।

फूल नहीं बदले गुलदस्तों के

धूल मेजपोश पर जमी हुई

जहाँ-तहाँ पड़ी दस किताबों पर

घनी सौ उदासियाँ थमी हुई

पोर-पोर टूटता बदन

कुछ कहने-सुनने का मन

कदम-कदम पर मौके, याद तुम्हें करने के।

अरसे से बदला रूमान नहीं

चाबी क्या जाने रख दी कहाँ

दर्पण पर सिन्दूरी रेख नहीं

चीज नहीं मिलती रख दो जहाँ

चौके की धुँआती घुटन

सुग्गे की सुमिरनी रटन

कदम-कदम पर मौके, याद तुम्हें करने के।



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