भारत छोड़ो आंदोलन में कूदे ग्वालियर के युवा

09  अगस्त

स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर-1

इस वर्ष हम आजादी की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह अवसर है उन महान स्वतंत्रता सैनानियों और क्रांतिकारियों को याद करने का जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके देशवासियाें को अंग्रेजों की घुटनभरी गुलामी से निकाल कर आजाद फिज़ा का अहसास कराया। इस पावन अवसर में हम अपने पाठकों के लिए ग्वालियर में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किए गए संघर्ष की गाथा लेकर आए हैं। देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष में ग्वालियर का अहम योगदान है और इसका इतिहास विस्तृत है, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं काे यहां समेटने की कोशिश हमने की है। जिसे आज 9 अगस्त को अगस्त क्रांति से प्रारंभ कर 15 अगस्त आजादी की वर्षगांठ तक 'स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर' शीर्षक से 7 किस्तों में प्रस्तुत किया जाएगा।

 

@ राहुल आदित्य राय

ग्वालियर। फिरंगियों को देश से खदेड़ने के लिए महात्मा गांधी द्वारा किए गए आव्हान पर ग्वालियर में भी स्वतंत्रता सैनानियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की। सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए गए। यहां स्वतंत्रता सैनानियों का जोश देखकर अंग्रेजी हुकूमत भी थर्रा गई थी।

10 अगस्त 1942 को सार्वजनिक सभा और विद्यार्थी संघ ने हड़ताल की घोषणा कर दी। सार्वजनिक सभा ने प्रभात फेरियां निकालीं और जनता में चेतना भरने का प्रयत्न किया। स्कूल, मिल, कॉलेज बंद कर सरकार के साथ असहयोग करने का आव्हान किया। मिल और स्कूल, कॉलेज पर धरना शुरू हो गया। इसका असर यह हुआ कि हर तरफ आक्रोश भड़क गया। चार दिन बाद आंदोलन उग्र हो गया। विक्टोरिया कॉलेज (अब महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय) में हजारों विद्यार्थी इकट्ठे हुए और जुलूस के रूप में नारे लगाते हुए महाराज बाड़े पर पहुंचे।

इसमें तीन हजार से अधिक विद्यार्थी थे, जिनमें अली अहमद, रामरूप तिवारी एवं धुले साहब आगे चल रहे थे। आंदोलन की ज्वाला भड़कती जा रही थी। देशभक्त छात्र उग्र हो गए और उन्होंने एक बस को आग के हवाले कर दिया और सिपाहियों की पगड़ी उतार ली।

इसका असर यह हुआ कि हुकूमत ने लाठीचार्ज करवा दिया। जिसमें कई लोग लहूलुहान हो गए। घटना की जांच कराई गई और 17 नेताओं को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए। जिस पर दत्ताजी राव, एस सीथोले, माताप्रसाद, उदय किशोर, सुरेन्द्रनाथ गुप्ता, बैकुण्ठनाथ गुप्ता, राजेन्द्र सिंह, कृष्ण गोपाल अग्निहोत्री, कृष्ण बिहारी, पी.के. जुत्सी, उद्धव कुमार, चेतराम चौबे, कन्हैयालाल, टीपू टम्बाली, हीरा सिंह एवं नाथू प्रसाद गिरफ्तार कर लिए गए।

हुकूमत चाहती थी कि आंदोलन थम जाए और स्कूल कॉलेज फिर से खुल जाएं। लेकिन इन नेताओं की गिरफ्तारी ने गुस्सा और भड़का दिया। इसके बाद 55 और नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए।

हुकूमत जितना दमन कर रही थी उसका उल्टा असर हो रहा था। स्वतंत्रता की आग बुझने के बजाय और भड़क रही थी। गिरफ्तारियों के बाद 22-23 अगस्त को भेलसा सार्वजनिक सभा कार्यसमिति की बैठक हुई, जिसमें आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया। इस फैसले का पता चलते ही सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए सभी नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश दिए। श्यामलाल पाण्डवीय, जगन्नाथ प्रसाद मिलिन्द, करकर बमोल, डॉ़.सदानंद, भजनलाल शर्मा, देवलाल रूद्र, प्रभुदयाल एवं गजाधर प्रसाद सहित सैकड़ों नेताओं को पकड़कर शिवपुरी जेल भेज दिया गया।

आंदोलन फिर भी नहीं थमा और प्रतिदिन एक जत्था भेजने का निर्णय लिया गया। महिलाएं भी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभा रहीं थीं। बाड़े से उनके जुलूस भी निकल रहे थे। हुकूमत ने मदनदेवी, जमुनाबाई, और लक्ष्मीबाई वैश्य को गिरफ्तार कर भेलसा भेज दिया।

अगस्त क्रांति और अंचल

ग्वालियर के आसपास के अंचल में राजनीतिक चेतना व्यापक थी। हर तरफ स्वतंत्रता के सिपाही फिरंगियों को खदेड़ने के लिए जान हथेली पर लिए खड़े थे। मुरैना में छीतरमल जैन की अध्यक्षता में बैठक कर आंदोलन को तेज करने का निश्चय किया गया। आंदोलन भड़का तो रामगोपाल बंसल, विधि चन्द्र, अम्बिका प्रसाद, विभा मास्टर, हरिचंदर चौधरी, प्रभुदयाल वैश्य, हीरालाल बंसल, मोतीलाल, मुन्नालाल पंचोली, हरगोविन्द, बालमुकुन्द शर्मा, हरीदास राठी, हरीदास माहेश्वरी, गुलाब चन्द्र वर्मा सहित सैकड़ों लोग गिरफ्तार कर लिए गए। भिण्ड में भूता और यशवंत सिंह कुशवाह ने जिले में घूमकर आंदोलन को तेज किया। उन्हें जेल भेज दिया गया। इससे आंदोलन भड़क गया और लोगों ने रेल की पटरी उखाड़ दी, टेलीफोन के तार काट दिए। भिण्ड और ऐंतहार स्टेशन के बीच सवारी गाड़ी को उलट दिया। कई लोग गिरफ्तार कर लिए गए। श्योपुर और शिवपुरी में भी आंदोलन कारियों ने गतिविधियां तेज कर दीं, जिस पर सैकड़ों लोग जेल में डाल दिए गए।

स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर अन्य किस्तें यहाँ पढ़ें -

किस्त #2. नेताओं की तस्वीर रखने पर गिरफ्तारी

किस्त #3. गोवा से हथियार लाते थे क्रांतिकारी

किस्त #4. 'ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस' में कड़ी यातनाएं दी गईं क्रांतिकारियों को

किस्त #5. दो युवा क्रांतिकारी भाइयों ने छकाया पुलिस को

किस्त #6. सिर कटाना मंजूर टोपी उतारना नहीं

किस्त #7. चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह आते थे ग्वालियर, काकोरी गए थे यहां से बम

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