गोवा से हथियार लाते थे क्रांतिकारी

स्वतंत्रता संग्राम और ग्वालियर-3

राहुल आदित्य राय

11  अगस्त

ग्वालियर। हर कीमत पर आजादी हासिल करने के लिए तत्पर युवा 1921 के असहयोग आंदोलन की विफलता से चिंतित हो उठे। उनका ध्यान सशस्त्र क्रांति की ओर गया। ग्वालियर में भी क्रांतिकारी दल का गठन किया गया। इस दल को हथियारों की आवश्यकता थी। लेकिन, ग्वालियर से खरीदे गए हथियार धोखा देने लगे, तब क्रांतिकारी गोवा से हथियार खरीदकर लाते थे, जिन्हें यहां सप्लाई किया जाता था।

बंगाल में क्रांतिकारियों के संगठन अनुशीलन समिति की ओर से दास गुप्ता बाबू को ग्वालियर भेजा गया। उन्होंने यहां मिल में काम किया और क्रांतिकारी दल का गठन किया, जो बाद में ग्वालियर-गोवा कान्सप्रेसी ग्रुप के नाम से जाना गया। इसमें मुख्य रूप से गिरधारी सिंह, श्री रामचन्द्र सर्वटे, श्री बालकृष्ण शर्मा तथा श्री स्टीफन जोजफ फर्नांडीस थे। यह सभी ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाने के लिए सशस्त्र संघर्ष में जुट गए।

बंगाल के ग्रुप को हथियार सप्लाई करने की जिम्मेदारी ग्वालियर के ग्रुप को दी गई। लेकिन यहां से खरीदे गए हथियार एक्शन के दौरान धोखा देने लगे। तब किसी अन्य स्थान से हथियारों की व्यवस्था करने पर विचार किया गया। यह तय किया गया कि गोवा से हथियार खरीदे जाएं। श्री स्टीफन मूलत: गोवा के निवासी थे, लेकिन उनके पिता श्री पिन्टू मास्टर को ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया यहां गाड़ियों पर रंग रोगन करने के लिए लाए थे। यहां उन्हें इंजीनियरिंग वर्कशॉप में नियुक्त कर दिया गया था, तब वे यहीं बस गए थे। कच्ची उम्र में ही स्टीफन क्रांतिकारियों के संपर्क में आ गए थे।

गोवा से हथियार खरीदने के लिए श्री स्टीफन और श्री बालकृष्ण शर्मा को गोवा भेजा गया। लंबे समय तक वहां रहने के बाद पुर्तगोली सिपाहियों से रिवॉल्वर व कारतूस लेने में सफल हो गए। इन हथियारों को यह लोग ग्वालियर भेजते और श्री रामचन्द्र सर्वटे एवं गिरधारी सिंह इन्हें अन्य क्रांतिकारियों को सप्लाई करते थे।

यह काम बहुत जोखिमभरा था, लेकिन आजादी के दीवाने क्रांतिकारी हर जोखिम उठाने को तैयार थे। श्री स्टीफन बड़े हिम्मती थे। वह एक बार चार रिवॉल्वरों को अपनी जांघों पर बांधकर गोवा से चले, लेकिन किसी तरह पुलिस को इसकी खबर हो गई। पंजिम से एक अधिकारी उनका पीछा कर रहा था। उसने बम्बई (अब मुंबई) में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें बड़ी कठोर यातनाएं दी गईं। उनकी तलाशी के दौरान श्री रामचन्द्र सर्वटे के नाम एक पत्र पुलिस को मिल गया, जिसके आधार पर दिल्ली में श्री गिरधारी सिंह तथा श्री सर्वटे एवं ग्वालियर में श्री बालकृष्ण शर्मा, श्री बाल मुकुन्द शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया। इन पर बम्बई की अदालत में मुकदमा चलाया गया। जो ‘ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस’ के नाम से जाना गया। इन सभी को जेल में कठोर यातनाएं दी गईं।

 

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किस्त #1. भारत छोड़ो आंदोलन में कूदे ग्वालियर के युवा

किस्त #2. नेताओं की तस्वीर रखने पर गिरफ्तारी

किस्त #4. 'ग्वालियर-गोवा-बम्बई षडयंत्र केस' में कड़ी यातनाएं दी गईं क्रांतिकारियों को

किस्त #5. दो युवा क्रांतिकारी भाइयों ने छकाया पुलिस को

किस्त #6. सिर कटाना मंजूर टोपी उतारना नहीं

किस्त #7. चन्द्रशेखर आजाद और भगत सिंह आते थे ग्वालियर, काकोरी गए थे यहां से बम

 

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