UP:दो पत्नियां होने पर शिक्षक की भर्ती के अयोग्य, मुस्लिम संगठन नाराज

15 जनवरी.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में उर्दू के अध्यापकों की भर्ती पर प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि जिस व्यक्ति की दो बीवियां होंगी वह इस भर्ती के अयोग्य होगा। यूपी सरकार के इस फैसले का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध किया है। बोर्ड के मुताबिक UP सरकार की यह शर्त मुस्लिमों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।

हाल ही में UP सरकार द्वारा इस वर्ष प्राइमरी स्कूलों में साढ़े तीन हजार उर्दू अध्यापकों की भर्ती का नोटिस जारी किया गया था। प्रदेश सरकार के अनुसार नौकरी का आवेदन में अनिवार्य तौर पर अपनी वैवाहिक स्थिति की जानकारी देनी होगी। जिन्होंने दो शादियां की हैं, और दोनों पत्नियों के साथ रह रहे हैं, वे इस पद के लिए योग्य नहीं हैं। साथ ही, यदि कोई शादीशुदा महिला आवेदन करेगी तो उसे भी यह जानकारी देनी पड़ेगी कि क्या उसके पति ने दो शादियां की हैं, और क्या वह दोनों पत्नियों के साथ रह रहा है।

पेंशन का भ्रम मिटाने के लिए निर्णय : मंत्री

इस बारे में जब UP के बेसिक शिक्षा अधिकारी अहमद हसन से बात की तो उन्होंने कहा कि यह शर्त इसलिए रखी गई ताकि कर्मचारी की मौत के बाद पेंशन के हक को लेकर भ्रम की स्थिति न पैदा हो, और कर्मचारी की मौत के बाद लाभार्थी को लेकर कोई विवाद न हो।

मुस्लिमों के अधिकारों का हनन

इस मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि सरकार के आदेश की वजह से मुस्लिमों के अधिकारों का हनन हो रहा है। लखनऊ की ईदगाह के इमाम एवं बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली का कहना है कि सरकार ऐसी शर्तें नहीं लगा सकती। इस्लाम में 4 शादियों का प्रावधान है। फिर भी एक प्रतिशत मुस्लिम ही ऐसे हैं, जिनकी दो पत्नियां हैं। ऐसी शर्तें भर्ती प्रक्रिया में नहीं होनी चाहिए। महली का यह भी कहना है कि, यदि किसी व्यक्ति की दो पत्नियां हैं तो सरकार उसकी मौत के बाद पेंशन को दोनों पत्नियों में बराबर बांट सकती है। राज्य सरकार द्वारा जारी इन पदों की भर्तियों के लिए 19 जनवरी से आवेदन किया जा सकेगा।

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