प्रणब मुखर्जी के लिए नए ठिकाने की तलाश

27  अगस्त

अनिल जैन

हालांकि सरकार या सत्तारुढ़ भाजपा ने अभी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के उत्तराधिकारी की खोज नहीं की है लेकिन राष्ट्रपति भवन से उनका सामान समेटने का सिलसिला शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, उनके लिए नए घर की तलाश भी शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि प्रणब का कुछ सामान तो उनके नए बंगले में उनके साथ जाएगा और बाकी सामान उनके कोलकाता वाले घर भेज दिया जाएगा। प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 25 जुलाई, 2017 को समाप्त होगा। सेवानिवृत्ति के बाद उनके रहने के लिए उनकी सचिव ओमिता पॉल ने कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को एक पत्र लिखकर बंगला खोजने की इजाजत मांगी है। कुछ जगहों के नाम भी चिन्हित करके सिन्हा को भेजे गए हैं। प्रणब मुखर्जी का एक सरकारी घर दिल्ली के तालकटोरा रोड पर भी है। प्रणब ने अपनी जिंदगी के 20 साल वहीं गुजारे हैं लेकिन अब वे वहां नहीं रहना चाहते। वैसे वह बंगला अब सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त भी नहीं है।

अफलातून जेठमलानी

राम जेठमलानी वाकई अफलातून शख्सियत हैं- राजनीति में भी और वकालत के पेशे में भी। न तो राजनीति में उन्हें किसी पार्टी से परहेज है और न ही वकालत में किसी का भी मुकदमा लड़ने में वे संकोच करते हैं। पिछले चार दशक से वे संसद में हैं। कभी इस पार्टी से तो कभी उस पार्टी से लोकसभा या राज्यसभा में पहुंच जाते हैं। थोड़े दिनों पहले ही लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की ओर राज्यसभा में पहुंचे हैं। अभी उनकी उम्र 92 वर्ष है और राज्यसभा में उनका कार्यकाल 2022 तक है। यानी रिटायरमेंट के समय वे 99 के हो जाएंगे। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक वे तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ कोर्ट में चल रहे मामले को पैरवी के लिए अपने हाथ में लेने वाले हैं। कयास लगाया जा रहा है कि जेठमलानी ने 2022 के बाद अपनी राज्यसभा सदस्यता बरकरार रखने के बारे में अभी से इंतजाम करना शुरू कर दिया है।

शिवराज की चिंता और उम्मीद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रिश्तों की अहम परीक्षा अगले महीने होने वाली है जब मध्य प्रदेश के लिए नए राज्यपाल का नाम तय किया जाएगा। मौजूदा राज्यपाल रामनरेश यादव उन चंद राज्यपालों में हैं, जिन्हें यूपीए सरकार ने नियुक्त किया था लेकिन वे भाजपा की सरकार बनने के बाद भी अपने पद पर कायम रहे। माना जा रहा है कि यादव की वजह से ही शिवराज भी अब तक बचे रहे हैं। व्यापमं घोटाले में यादव और शिवराज दोनों पर ही आरोप लगे थे। अगर यादव को हटाया जाता तो शिवराज को भी हटाने की मांग होती। अब शिवराज इस बात को लेकर चिंतित हैं कि नया राज्यपाल कौन होगा। दिल्ली में उनके करीबी लोगों का मानना है कि गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल का राज्यपाल बनना शिवराज के लिए ज्यादा मुफीद रहेगा।

दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में

दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर इन दिनों पार्टी के कई नेताओं की जुबान पर एक फिल्मी गाना चढ़ा हुआ है- '...दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।’ दरअसल केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह पाने से वंचित रहे कुछ भाजपा नेताओं को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। तब से ही ऐसे नेताओं को इंतजार है पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की नई टीम बनने का। शाह को दूसरे कार्यकाल के लिए अध्यक्ष निर्वाचित हुए छह महीने से ज्यादा हो गए हैं लेकिन वे अभी भी पुरानी और आधी-अधूरी टीम से ही काम चला रहे हैं। जब मोदी मंत्रिपरिषद का विस्तार हुआ था तब खबर थी कि दो-चार दिन में ही शाह भी अपनी टीम का ऐलान कर देंगे। लेकिन दो महीने होने को आए अभी तक ऐलान नहीं हुआ। पार्टी में दूसरे सभी नेता सिर्फ इस बारे में कयास लगाने की स्थिति में ही हैं। पार्टी के एक प्रवक्ता का इस बारे में कहना है कि नई टीम न भी बने तो क्या फर्क पड़ता है, सारे काम और फैसले तो अमित शाह को ही करना है, सो वे कर ही रहे हैं।

राजनीति के अखाड़े में नरसिंह?

साजिश के चलते कुश्ती के अखाडे से बाहर हुए नरसिंह यादव को राजनीति के अखाड़े में उतारने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की ओर बगैर पूरी तैयारी के रियो ओलंपिक में हिस्सा लेने जा पहुंचे पहलवान नरसिंह यादव का भले ही कुश्ती का करिअर चौपट हो गया हो, लेकिन भाजपा को तो उसके भीतर अपने लिए संभावना नजर आ रही है। यही वजह है कि पार्टी की ओर से उस पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह भाजपा में शामिल हो जाए और कुश्ती में न सही राजनीति में ही अपना करिअर बना ले। गौरतलब है कि नरसिंह यादव उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा उसका इस्तेमाल यादव समुदाय के मतदाताओं को रिझाने के लिए करना चाहती है। इस सिलसिले में भाजपा सांसद और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह नरसिंह से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।

और अंत में

अरुण जेटली, मनोहर पर्रिकर, प्रकाश जावड़ेकर, नितिन गडकरी, उमा भारती, विजय गोयल, किरण रीजेजू, वीके सिंह आदि केंद्रीय मंत्रियों के हाल में ही अहम मसलों पर जिस तरह के अजीबो-गरीब बयान आए उस पर भाजपा के ही एक मार्गदर्शकनुमा नेता की टिप्पणी है कि कमी तो कांग्रेस में भी नहीं थी, लेकिन हमारे यहां तो हर शाख पर मौजूद हैं।

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