!! मोदी और सरकार से हर सवाल पूछिए लेकिन 'उनकी' तरह हद पार न कीजिए ..

21  सितम्बर

@ डॉ राकेश पाठक

प्रधान सम्पादक, डेटलाइन इंडिया

सेना के ठिकाने पर नापाक हमले के बाद सरकार और खास तौर पर नरेंद्र मोदी निशाने पर हैं। हर कोई सवाल पूछ रहा है लेकिन बेलगाम सोशल मीडिया पर हद भी पार हो रही है।

ये सच है आज जिनसे सवाल पूछे जा रहे हैं वे आज से सिर्फ दो बरस पहले बदसलूकी की हद पार कर दूसरों पर कीचड़ उछाल रहे थे। इस हमले से पहले भी शायद ही कोई मौका रहा हो कि हर असहमत 'उनकी' शाब्दिक हिंसा का शिकार न हो रहा हो...!

हैरत नहीं होना चाहिए कि आज सत्ता के शिखर पर बैठे 'महामानव' को कोसने में उनके अपने तम्बुओं में बैठे लोग भी शामिल हैं।

मोहभंग होने पर भैरायी हुयी भीड़ अपने 'आराध्य' को उन्हीं गालियों से नवाज़ रही है जिनकी दीक्षा इन आराध्य की क्षत्र छाया में ही पायी थी। दूसरे को भस्म करने के लिए दिया गया 'वरदानी हाथ' अब खुद सत्ता के सिर पर रखने को लपलपा रहा है। और वे जो दो ढाई बरस से इस गाली गुफ्ता का शिकार हो रहे थे अब पलट वार कर रहे हैं। हाथ आये मौके को छोड़ना नहीं चाहते और हद पार कर रहे हैं।

तो जैसी गालियां आपने खायीं हैं वे सूद समेत वापस करके आप ठीक कर रहे हैं...जी नहीं बिलकुल नहीं।

आज जो सत्ता में हैं वे और उनकी जमात पहले ही बहुत कुफ़्र बरपा चुकी है.. अब अगर आप भी वही कर रहे हैं तो सरासर गलत है।

हां.. देश की सीमा पर आये खतरे के वक्त भी सवाल कीजिये। शालीन लेख, व्यंग्य, कटाक्ष, कार्टून, कैरीकेचर से कटघरे में खड़ा कीजिये मोदी और उनकी सरकार को।

इस वक्त भी सवाल पूछना कोई देशद्रोह नहीं हो जायेगा। जो आज सत्ता में हैं उन्होंने तो बदसुलूकी की हदें पार कीं थीं, ऐसे हर मौके पर.. तो तब सवाल पूछना देशद्रोह नहीं था, फिर अब कैसे होगा...? वे तो बिसूरेंगे ही कि इस वक्त भी आप राजनीति कर रहे हैं, बिसूरने दीजिये क्योंकि सवाल पूछने का हक़ उनके मौके पर राजनीति नहीं था, तो अब भी नहीं है।

हां, खोज कर लाइये हर पुराना बयान..., अखबार की कतरन, चैनलों को दिए शेखी भरे इंटरव्यू की क्लिपिंग....

याद दिलाइए उन्हें कि वे 26/11 के बाद मुम्बई में कैसा प्रहसन करने पहुँच गए थे... बताइये उन्हें कि किसी जरखरीद टीवी चैनल के स्टूडियो में बैठ कर आप किस तरह तब के पी एम की निर्लज्ज खिल्ली उड़ा रहे थे...

और इनके आईने में बेनकाब कीजिये सत्ता के पाखण्ड को...शालीनता से याद दिलाइए कि कल आप किस कदर घटिया बोली बोल रहे थे...अगर आज भी कोई और सत्ता में होता तब आप फिर अपनी घटियायी से बाज न आते...।

बस इतना ध्यान रहे कि देश ने इन्हें खुद चुना है और पूरे मन से चुना है..वे सिर्फ 'उनके' प्रधानमंत्री नहीं हैं..., हमारे, आपके हम सबके हैं... इसलिए हर सवाल सलीके से हो..

इतिहास में दर्ज़ रहेगा कि कुएं में ये भांग इनकी खुद की डाली हुयी है.. वे सपने में भी नहीं सोचते होंगे कि इस भंग के नशेड़ी इतनी जल्दी उनको ही गरियाने का मौका पा जाएंगे....! उन्हें जो ठीक लगे करने दीजिये, लेकिन आप अपनी तहज़ीब मत छोड़िये...

सो प्लीज़ सवाल पूछिए लेकिन 'उनकी' तरह हद पार न कीजिये...!

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