|| फिर भी..जंग टलती रहे तो बेहतर है..

19  सितम्बर

@डॉ राकेश पाठक

प्रधान संपादक ,डेटलाइन इंडिया

सीमान्त पर सेना के बड़े ठिकाने पर नापाक हमले के बाद देश में गुस्सा है। चारों ओर से बदला...बदला की आवाज़ें उठ रहीं हैं। गुस्सा जायज़ है क्योंकि हमने 17 सपूत खोये हैं.. यह सवाल भी जायज़ है कि आखिर कब तक...

वर्तमान सत्ता और शिखर नेतृत्व को पूजने वाले भी व्यथित ह्रदय हैं। उम्मीदों का जो तूमार इन ख़ास तरह के समर्थकों ने बाँध रखा था वह ढेर हो चुका है। असल में युद्धोन्माद भी इसी तरह के लोगों में ज्यादा है।

सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बस आज अभी इसी पल युद्ध छेड़ देने का आह्वान कर रहा है। जन आकांक्षाओं की छाती अब कड़ी निंदा, दोषी बख्शे नहीं जायेंगे... अल्लम गल्लम् बयानों से ठंडी होती नहीं दिखती। आग में घी के लिए चैनल वाले बैठे ही हैं जो आज आधी रात बाद दुश्मन को नक़्शे से मिटा देने का ऐलान कर रहे हैं।

तो क्या पकिस्तान के साथ युद्ध अवश्यम्भावी है... क्या अब और कोई रास्ता नहीं बचा.. क्या सचमुच ये युद्ध किसी नतीजे पर पहुंचा सकता है... क्या ऐसे किसी युद्ध की चिंगारी एटमी हथियारों के जखीरे तक नहीं पहुंचेगी... क्या युद्ध छिड़ने पर दुनिया का दरोगा अमरीका और पाक का बड़ा दादा चीन मूक दर्शक बने रहेंगे... क्या संयुक्त राष्ट्र संघ इस युद्ध की तरफ पीठ करके बैठा रहेगा...??

प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़...युद्ध की भेरी बजाने से पहले इन सवालों पर गौर कर लीजिये। एक एक सवाल दो देशों के करोड़ों लोगों और इंसानियत के भविष्य से बाबस्ता है..

सरकार और सभी सम्बंधित पक्षों को काम करने दीजिये.. सोचने दीजिये और क्या क्या तरीके हो सकते हैं.. झगड़ालू पड़ोसी से निपटने के.... समीक्षा करने दीजिये कि कूटनीति में कब कहाँ चूक हुयी है और सीमाओं की सुरक्षा में कहाँ सुराख रह गए हैं...?

 

युद्ध किसी भी दशा में अपिरिहार्य होने पर भी अंतिम विकल्प होना चाहिए। खास तौर पर तब जब दोनों देश एटमी हथियारों से सुसज्जित हों। वे लोग जड़ मूर्ख हैं जो कहते हैं कि दस बीस बम पटक दो पाकिस्तान ख़त्म हो जायेगा... (एटमी खतरे पर फिर कभी विस्तार से लिखूंगा)।

यह खाकसार इस मौके पर न सरकार को कोसने का हिमायती है और न नरेंद्र मोदी को। ये वक्त है रणनीति पूर्वक शत्रु राष्ट्र के साथ निपटने की तैयारी का। युद्ध से पहले हर सम्भव विकल्प पर विचार कीजिये। जब कुछ न बचे तब जंग कीजिये। हर जंग में देश हमेशा साथ रहा और रहेगा...

और जो लोग जंग के लिए देश और सरकार को भड़का रहे हैं वे साहिर लुधयानवी का लिखा पढ़ा जान लें...

साहिर की कही नज़्म में से अभी सिर्फ चार लाईनें...

इसलिए ऐ शरीफ इंसानो

जंग टलती रहे तो बेहतर है

आप और हम सभी के आँगन में

शम्म जलती रहे तो बेहतर है।

और हाँ
एक बात लिख कर रख लीजिये...युद्ध फिलहाल नहीं होगा...वजह बहुत सादा है...
लोकसभा चुनाव अभी दूर है।
इन्तिज़ार कीजिये 2018 के बाद किसी भी बहाने एक सीमित युद्ध छिड़ने का...!
  क्योंकि युद्ध के बाद उठे राष्ट्रवाद के ज्वार से ही जनादेश इनके हक़ में निकल सकता है , और कोई चारा बचा भी नहीं है।

अामीन

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