!! नगालैण्ड उत्तर कथा: पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त

23 जून

@डॉ राकेश पाठक

प्रधान संपादक ,डेटलाइन इंडिया

नगा समझौते पर उठे सवालों पर गृह राज्य मंत्री किरण रिजूजी का बयान आ गया है कि 'अभी' ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ है।

आइये हम सब दही खाएं और प्रसन्न रहें। कल इस खाकसार ने भी यही दुआ की थी कि ऐसा न हुआ हो।

'कट पेस्टिओं और 'फोरवर्डीओं' को भी बहुत मेहनत करने पर भी 'नगा एकॉर्ड' पब्लिक डोमेन में ढूंढे नहीं मिला] लेकिन रिजूजी के बयान ने छाती ठंडी कर दी।

लेकिन कुछ सवाल हैं जिनके जवाब चाहिए। आइये सिलसिलेवार समझते हैं कि या इलाही ये मज़ारा क्या है...!

पहले जान लीजिये कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट (जो अब तक अधिकृत रूप से सामने नहीं है) में ऐसा क्या है जो चिंता बढ़ा रहा है। ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमिटी के मुखिया आर एन रवि इस शांति वार्ता के मध्यस्थ हैं। आर एन रवि ने यानि भारत सरकार ने इस फ्रेमवर्क में माना है कि --

1. Indians and Nagas will live through sharing of sovereign power।

2. The two entities (India and Nagaland/-lim) will have peaceful co-existence in the spirit of equality ।

अर्थात

'भारत और नगालैण्ड सम्प्रभु सत्ता की साझेदारी करेंगे।

'दो इकाईयां ( भारत और नगालैण्ड) बराबरी की भावना से शांतिपूर्ण सह अस्तित्व बनाये रखेंगे।'

तो क्या नगालैण्ड एक सम्प्रभु और प्रथक इकाई मान लिया गया है...? अगर हां तो देश को बताइये तो कि कब, क्यों, कहाँ....?

इसी 'फ्रेमवर्क एग्रीमेंट' को ऐतिहासिक समझौता बताया गया।

3 अगस्त 2015 की एक दोपहर 7 रेसकोर्स रोड की देहरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी NSCN (IM) के महासचिव मुइवा आदि को विदा करते दिखते हैं। उनका ट्वीट आता है कि देश के लिए खुशखबरी आने वाली है। बाकायदा कहा गया कि नगा विद्रोहियों से ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है।

समझौता किन शर्तों पर हुआ और क्या प्रावधान हैं, देश के सामने आज तक नहीं आया। बाद में राजनाथ सिंह ने कह दिया कि मुझे कुछ नहीं पता अजीत डोभाल से पूछिए।

समझौते की घोषणा कुछ ऐसी रही मानो 'सोहर में से दाई ने खुशखबरी की आवाज़ तो लगायी लेकिन साल भर बाद भी यह नहीं बताया कि लड़का हुआ कि लड़की। और यह भी नहीं बताया कि जच्चा बच्चा कैसे हैं...?'

अब अलग झंडे और पासपोर्ट की बात कहाँ से आई यह जान लीजिये।

नगा विद्रोहियों की स्वयंभू सरकार के गृह मंत्री किलो किनोसेर ने बाकायदा कहा कि भारत सरकार ने अलग झंडे और पासपोर्ट की बात मान ली है। यह 2015 में हुए समझौते का हिस्सा है। इस मंत्री ने यह भी कहा कि नगा ऐतिहासिक रूप से भी कभी भारत का हिस्सा नहीं रहे। अब मज़बूत नगा देश के लिए विचार शुरू करें।

जरा सोचिये तो सही डेविड कोलमेन हैडली जैसे आतंकी के बयान को आप देव वाणी मान लेते हैं और बल्लियों उछलने लगते हैं क्योंकि वो आपकी मन माफिक बात कहता है।

और यहाँ एक ऐसा आदमी कह रहा है जो प्रधानमंत्री आवास में चाय पीने वालों में से एक है तो आप कहते हैं झूठ है। काश कि सचमुच झूठ ही हो।

सवाल यह है कि अगर समझौता हुआ तो क्या उसे संसद को बताया गया? क्या इसका गज़ट नोटिफिकेशन हुआ..? अगर ऐसा होता तो एक एक शब्द सामने होता। पूर्व में हुए शांति समझौते कौमा, फुल स्टॉप सहित पहले दिन से देश के सामने रहे हैं।

तब तमाम विपक्ष और पड़ोसी राज्यों की सरकारों तक को भरोसे में लिया गया था। अब नगालैंड के अगल बगल वाले मुख्यमंत्री तक अँधेरे में हैं।

आखिर में एक बार फिर यही कामना है कि देश के भीतर देश की बात सिरे से गलत ही साबित हो।

कल पढ़िए::

!! कभी भारत को अपना देश नहीं माना नगाओं ने

* सायमन से मनमोहन तक

विद्रोह की व्यथा कथा

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