इस चमत्कार का रहस्य क्या है?

27  अगस्त

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

लखनऊ के एक सफाई कर्मचारी परिवार में चमत्कार हो रहा है। इस परिवार में तीन बच्चे हैं और ये तीनों बच्चे इतने अधिक प्रतिभाशाली हैं कि आप दांतों तले उंगली दबा लें। इनके माता-पिता संभवतः दलित हैं। मां बिल्कुल अनपढ़ है। पिता सफाई कर्मचारी हैं। मजदूर हैं। सबसे छोटी बच्ची अनन्या है। उसकी उम्र सिर्फ चार साल है लेकिन उसे 9 वीं कक्षा में भर्ती किया गया है। उसकी इस भर्ती को स्कूलों के अधीक्षक ने मान्यता दी है। अनन्या से बड़ा भाई शैलेंद्र है, जिसने 14 साल की उम्र में कंप्यूटर साइंस में स्नातक की परीक्षा पास की थी। उसे 75 प्रतिशत नंबर मिले थे। आजकल वह बेंगलुरु में साॅफ्टवेयर इंजीनियर है। अनन्या की बड़ी बहन सुषमा ने तो विश्व-रिकार्ड कायम किया था। उसने सिर्फ 7 साल की उम्र में दसवीं कक्षा की परीक्षा पास कर ली थी। वह लखनऊ विवि की सबसे कम उम्र की विज्ञान स्नातक थी। अब वह पीएच.डी. कर रही है।

क्या यह चमत्कार नहीं है? देश के वैज्ञानिक, भविष्यवक्ता, चिकित्सा-विज्ञान के डाॅक्टर और डीएनए विशेषज्ञ आज तक यह पता नहीं कर पाए हैं कि इस चमत्कार का रहस्य क्या है? किसी अनपढ़ और गरीब परिवार में ऐसे बच्चे कैसे हो सकते हैं, इस प्रश्न का हल शायद हमारा आधुनिक विज्ञान खोज ही नहीं पाएगा, क्योंकि उसकी अपनी सीमा है। वह इस भौतिक शरीर से आगे जाता ही नहीं है। उसे इस शरीर से अलग आत्मा के अस्तित्व में विश्वास ही नहीं है। जो लोग आत्मा में विश्वास करते हैं, वे उसे अमर मानते हैं और उसके पुनर्जन्म में भी विश्वास करते हैं। यदि आप पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं तो इस चमत्कार की व्याख्या आसानी से हो सकती है। कोई अत्यंत असाधारण प्रतिभाशाली आत्मा ने लखनऊ के तेज बहादुर के घर जन्म ले लिया। फिर भी एक सवाल रह जाता है। तीन-तीन प्रतिभाशाली आत्माओं का एक ही घर में पुनर्जन्म कैसे हुआ होगा? क्यों हुआ होगा? यह प्रश्न हमें फिर भौतिक विज्ञान की तरफ ठेल देता है। यह संभव है कि पिता तेज बहाुदर और उन बच्चों की माता के संयोग से ऐसी विलक्षण प्रतिभा का जन्म हुआ है। लेकिन क्या विज्ञान इसे अपनी प्रयोगशाला में सिद्ध कर सकता है? विज्ञान कुछ सिद्ध करे या न करे, इस चमत्कार ने यह तो सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा या पांडित्य किसी जाति विशेष की बपौती नहीं है।

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